कब है चैत्र अमावस्या? इस दिन करें ये 3 अचूक उपाय, काल सर्प दोष से मिल जाएगी मुक्ति!

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कब है चैत्र अमावस्या? इस दिन करें ये 3 अचूक उपाय, काल सर्प दोष से मिल जाएगी मुक्ति!

कब है चैत्र अमावस्या:हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के अगले दिन अमावस्या पड़ती है. इस बार सोमवार, 08 अप्रैल को चैत्र अमावस्या पड़ रही है. इसे भूतड़ी अमावस्या के नाम से भी जाता है. वहीं सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जाता है. पूजा-पाठ, स्नान-दान और पितरों के तर्पण आदि के नजरिए से तो इस दिन का बड़ा महत्व होता है. हर अमावस्या पर कालसर्प दोष का निवारण किया जाता है. वहीं हम आपको ऐसे अचूक उपाय के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें सोमवती अमावस्या के दिन करने से कालसर्प दोष से छुटकारा पाया जा सकता ह

जानें कब है चैत्र अमावस्या

उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित श्री सच्चा अखिलेश्वर महादेव मंदिरके पुजारी शुभम तिवारी ने लोकल 18 के साथ बातचीत में बताया कि इस बार सोमवार को चैत्र अमावस्या पड़ रही है. इसलिए इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाएगा. साथ ही इसे भूतड़ी अमावस्या भी कहा जाता है. पूजा-पाठ, स्नान-दान और पितरों के तर्पण आदि के लिए ये दिन बहुत शुभ माना जाता है. वहीं कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए इस दिन कई उपाय किए जाते हैं. पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र अमावस्या की शुरुआत 8 अप्रैल 2024, सुबह 03 बजकर 21 मिनट पर होगी और इसका समापन रात को 11 बजकर 50 मिनट पर होगा.

कब है चैत्र अमावस्या

कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए उपाय

पुजारी शुभम ने बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन इन 3 अचूक उपायों को करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है.

इस दिन प्रातः काल स्नान-ध्यान कर देवों के देव महादेव की पूजा जरूर करें. इसके बाद चांदी या तांबे से बनी नाग और नागिन को बहती जलधारा में प्रवाहित कर दें. ऐसा करने से कुंडली से कालसर्प दोष समाप्त होता है.

सोमवती अमावस्या के दिन राहु और केतु के बीज मंत्र (ॐ रां राहवे नमः और ॐ क्र केतवे नमः) का जप अवश्य करें. इस जप को करने से कालसर्प दोष कम हो जाता हैं.

कालसर्प दोष से निजात पाना पाने के लिए अमावस्या के दिन गंगा जल से स्नान कर गंगाजल से भगवान का अभिषेक करें. इसके साथ ही शिव चालीसा का पाठ करें.

चैत्र अमावस्या को हिन्दू पंचांग में एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह त्योहार सनातन धर्म के अनुसार विशेष मान्यताओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग विशेष पूजा-अर्चना, दान-धर्म करते हैं और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।

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