राम 2022 का अपने प्रिय भक्त हनुमान से मिलना पूरी जानकारी प्राप्त करें :

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(राम) महाकाव्य रामायण में वर्णित किष्किंधा कांड में श्रीराम-हनुमान की मुलाकात, वानर राजा सुग्रीव से मित्रता, भगवान श्रीराम की मित्रता, सीता को खोजने की सुग्रीव की प्रतिज्ञा, बाली और सुग्रीव का युद्ध, बाली-वध, अंगद का राजकुमार, ऋतुओं का विवरण, का विस्तृत विवरण वानर सेना का संगठन उपलब्ध है।

साथ ही ऐसी मान्यता है कि इस महाकाव्य के किष्किंधाकांड का पाठ करने से बिछड़े हुए परिवारों से मित्रता और मिलन होता है।

आपको बता दें कि किष्किंधा कांड का पाठ करने वाले। वे एक दोस्त के महत्व के बारे में जानते हैं और भक्त की भावना और गुणों का एहसास करते हैं। इसके साथ ही दोस्ती के रिश्ते को जाति-जाति और सभी धर्मों से ऊपर रखा गया है-

सुग्रीव और बाली का युद्ध – सुग्रीव बलि वधू
दक्षिण में ऋष्यमुका पर्वत पर सुग्रीव नामक वानर अपने कुछ साथियों के साथ रहता है। आपको बता दें कि सुग्रीव किष्किंधा के राजा बलि के छोटे भाई हैं, जिनके बीच मतभेद है। जिसके कारण बाली सुग्रीव को किष्किंधा राज्य से निकाल देता है और अपनी पत्नी को भी अपने साथ रखता है।

इस प्रकार दोनों भाई एक दूसरे के जीवन के दुश्मन बन जाते हैं और सुग्रीव किसी तरह बाली से अपनी जान बचाते हैं और वे उनसे छिपने के लिए ही ऋष्युमका पर्वत पर एक गुफा में रहते हैं।

वहीं दूसरी ओर जब राम और लक्ष्मण सीता माता की खोज में मलय पर्वत की ओर आते हैं तो सुग्रीव के वानर उन्हें देख लेते हैं और वे सुग्रीव को बताते हैं कि अच्छे कद के दो बलवान युवक अपने हाथों में धनुष-बाण लेकर पहाड़ की ओर आ रहे हैं। .

यह सुनकर सुग्रीव को लगता है कि उसके शत्रु भाई बाली के पास कोई छल है। वह इसके बारे में जानने के लिए अपने मित्र हनुमान को उनके पास भेजता है।

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राम का अपने प्रिय भक्त हनुमान से मिलना 

सुग्रीव की आज्ञा का पालन करते हुए हनुमान जी भगवान श्रीराम के पास जाते हैं, एक ब्राह्मण का वेष बदलकर वे प्रभु श्री राम से पूछते हैं कि राजा जैसा आर्कषित व्यक्तित्व के होकर वे जंगलों में क्या कर रहे हैं, लेकिन प्रभु  चुप्पी साधे रहते हैं।

जिसके बाद  हमुमान खुद अपनी सच्चाई उनके सामने बोलते हैं और बताते हैं कि वे एक वानर हैं और सुग्रीव के कहने पर यहां आए हैं। जिसके बाद प्रभु उन्हें अपने बारे में बताते हैं।

वहीं जब हनुमान जी को यह पता चलता है कि वे मर्यादा पुरुषोत्तम राम हैं तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता है और भावुक होकर प्रभु  के चरणों में गिर जाते हैं। दरअसल हनुमान जी जन्म से ही प्रभु के बहुत बड़े भक्त होते हैं और उन्हें हमेशा से ही उन्हें भगवान राम से मिलने का इंतजार था। इस तरह भगवान राम का अपने प्रिय भक्त हनुमान से मिलन होता है।

राम-हनुमान के मिलन के बाद लक्ष्मण जी उन्हें बताते हैं कि सीता-माता का किसी ने अपहरण कर लिया है, और वे उन्हीं को ढूंढ़ते-ढूंढते यहां तक आ पहुंचे हैं।

यह सुनकर हनुमान जी उन्हें वानर सुग्रीव के बारे में बताते हैं और यह भी बोलते हैं कि सुग्रीव, माता-सीता को खोजने में उनकी मद्द करेंगे। इसके बाद हनुमान राम-लक्ष्मण को लेकर सुग्रीव के पास जाते हैं।

इस तरह भक्त हनुमान की मद्द से प्रभु और सुग्रीव की दोस्ती हो गई और फिर सुग्रीव ने अपने भाई बालि को मारने के लिए भगवान  से मद्द भी मांगी थी।

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बालि का वध 

एक सच्चे दोस्त होने के नाते प्रभु , वानर सुग्रीव के दुखी मन को समझ जाते हैं और उसके दुश्मन भाई बालि से उसकेराज्य किश्किन्धा को वापस लाने का प्रण लेते हैं। अपने दोस्त सुग्रीव के साथ मिलकर मर्यादा पुरुषोत्तम बालि का वध करते हैं।

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इस तरह सुग्रीव का उनका राज्य किश्किन्धा  और उनकी पत्नी को वापस दिलवाते हैं। जिसके बाद सुग्रीव, भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम   को उनकी पत्नी सीता को खोजने में उनकी मद्द करने का वचन देते हैं।

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